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Category: Love Poem
कबिता / मुक्तक
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"मेरी सारु .....!" मेरी सारु , आज तिमी हराएकी छौ रे, गाउँघर छोडि, शहरलाई मन पराएकी छौ रे गाँलेको रुप देख्दा, तिमी धेरै डराएकी छौ रे सयौं सँग हरेक पल, प्रेम सागुँ तराएकी छौ रे रातो कालो रक्सी पिउँदै, पाईला लर्बाराएकी छौ रे टलपल टलपल तिम्रो जवानी, शहर भरि चढाएकी छौ रे, मेरी सारु, तिमी आज हराएकी छौ रे। -बि जे बान्तवा
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Read more Love Poem तिम्रो बिदाई पस्च्याटअका क्षणअहरु प्रबासी भूमिबाट प्रियसीलाई पत्र
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